वफादार

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वो बातों ही बातों में दिल को चुराते हैं
वो आँखों ही आँखों में अपना बनाते हैं

ये अदा है उनकी
या कोई शरारत
कहते है की पास हैं मेरे ,,
और छूने की चाहत से ही वो दूर चले जाते हैं

पराये हो गए वो,
जिन्हें हमराज़ कहते हैं
कभी न दूरियां देखीं,
जिन्हें हमसाज़ कहते हैं
अचानक
ये समय बदला,
बदले वो जिन्हें दिलसाज़ कहते हैं

बेवफ़ाई का ईनाम दे कर
यूँ छोड़ चले हैं वो
जिन्हें हम वफ़ादार कहते हैं


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